છે ગઝલ દર્દની ગિરા ‘ઘાયલ’,
માત્ર ભાષાની ઘાલમેલ નથી.
અમૃત 'ઘાયલ'

લયસ્તરો બ્લોગનું આ નવું સ્વરૂપ છે. આ બ્લોગને  વધારે સારી રીતે માણી શકો એ માટે આ નિર્દેશિકા જોઈ જવાનું ચૂકશો નહીં.

Archive for क़तील शिफ़ाई

क़तील शिफ़ाई શ્રેણીમાંના બધા પોસ્ટ (કક્કાવાર), સંપૂર્ણ પોસ્ટ માટે ક્લીક કરો.

मैं तो मर कर भी मेरी जान तुझे चाहूँगा - क़तील शिफ़ाई



मैं तो मर कर भी मेरी जान तुझे चाहूँगा – क़तील शिफ़ाई

ज़िन्दगी में तो सभी प्यार किया करते हैं
मैं तो मर कर भी मेरी जान तुझे चाहूँगा

तू मिला है तो ये एहसास हुआ है मुझको
ये मेरी उम्र मोहब्बत के लिये थोड़ी है
इक ज़रा सा ग़म-ए-दौराँ का भी हक़ है जिस पर
मैनें वो साँस भी तेरे लिये रख छोड़ी है
तुझपे हो जाऊँगा क़ुरबान तुझे चाहूँगा
मैं तो मर कर भी मेरी जान तुझे चाहूँगा

अपने जज़्बात में नग़्मात रचाने के लिये
मैनें धड़कन की तरह दिल में बसाया है तुझे
मैं तसव्वुर भी जुदाई का भला कैसे करूँ
मैं ने क़िस्मत की लकीरों से चुराया है तुझे
प्यार का बन के निगेहबान तुझे चाहूँगा
मैं तो मर कर भी मेरी जान तुझे चाहूँगा

तेरी हर चाप से जलते हैं ख़यालों में चिराग़ [ चाप = sound of footsteps , આહટ ]
जब भी तू आये जगाता हुआ जादू आये
तुझको छू लूँ तो फिर ऐ जान-ए-तमन्ना मुझको
देर तक अपने बदन से तेरी ख़ुश्बू आये
तू बहारों का है उनवान तुझे चाहूँगा [ उनवान = title ]
मैं तो मर कर भी मेरी जान तुझे चाहूँगा

ज़िन्दगी में तो सभी प्यार किया करते हैं
मैं तो मर कर भी मेरी जान तुझे चाहूँगा

– क़तील शिफ़ाई

વેલેન્ટાઈન ડે ના દિવસે આ સિવાય કોઈ વિચાર સૂઝતો નથી….જયારે પ્રેમ શુદ્ધ હોય ત્યારે હૃદય આ જ કહેશે….કોઈ જ પ્રત્યુત્તરનો-પ્રેમના સ્વીકાર કે ઈન્કારનો- ઉલ્લેખ સુદ્ધાં નથી આખી નઝમમાં !! હૃદય તો છલકાઈ છલકાઈને પ્રેમ કરતુ જ રહેશે….શ્વાસ બંધ થશે તો શું થઈ ગયું !!

Comments (12)